ह्रदय रोग से बचाव करता है, दालचीनी का प्रयोग
दालचीनी – ये न केवल हमारे खाने की खुशबू बढ़ाता है, बल्कि ये सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद भी साबित हुआ है। इसको अंग्रेजी में सिन्नमन (cinnamon) कहा जाता है।ये सबसे ज़्यादा श्रीलंका एवं दक्षिण भारत में मिलता है। दालचीनी के छाल का प्रयोग, मसाले में किया जाता है। इसकी खुशबू अलग ही होती है| खाने की खुशबू बढ़ाने के साथ-साथ ये खाने का स्वाद भी बढ़ा देता है| अलग ही खुशबू होने के कारण इसे गरम मसालों की श्रेणी में रखा गया है। गरम मसालों में इसका उपयोग भारत में हजारों वर्षों से होता आ रहा है।
इसकी छाल को २४ घंटों तक सुखाकर और साफ करके, हाथों से लपेटकर उनको एक मीटर लंबी, पतली नलियों के आकार में बाँधकर बेचा जाता है। दालचीनी के सुगंधित तेल का आर्थिक महत्व भी है।
इसकी छाल का चूर्ण बना कर भोजन में लिया जाये तो, आपकी धमनियों में कभी कोलेस्टरोल जमा नहीं होगा और ये ह्रदय रोग से भी बचाव करता है। इसका नियमित उपयोग करने से मुह्ह की दुर्गन्ध यानि की मुह्ह की श्वास की कठिनाई दूर हो जाती है । हृदय की धडकन में शक्ति का समावेश होता है। धमनी काठिन्य रोग में इसका हितकारी प्रभाव देखा गया है। बढे हुए कोलेस्टरोल को इसके सेवन द्वारा कम किया जा सकता है।
अगर आपको अनिद्रा यानि नींद ना आने की बीमारी है या फिर आपको अच्छी नींद नहीं आती है तो दालचीनी वाला दूध पीना आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा.रात में सोने से पहले एक गिलास दालचीनी वाला दूध लें, इससे आपको अच्छी नींद आएगी. और सुबह उठते समय आप खुद को तरोताज़ा महसूस करंगे|

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